बेतकल्लुफ

कुछ ना करना गुनाह, करना भी तो गुनाह, करके ही देख लेते हैं, बेफिजूल की है ज़िन्दगी वैसे भी
दिल खोलन चाहे है ये दिल, कुछ कहना भी है मुश्किल, खुदसे ही बात करते हैं, बेतकल्लुफ रखते हैं सबको ही

राहें हैं राह जैसी ही, मुश्किल मिलती है सबको ही,
क्यूँ ना देख लें जाके मुश्किल के पार क्या हैं छुपे खजाने?
चाहतें तो खूब रखते हैं, पर मेहनत से क्यूँ डरते हैं?
दुनिया में एक से हैं जितने भी हैं सब अनजाने!
ना देखे तो है लापरवाह, देखे तोह अपने मुंह मिठू मियाँ, दुनिया में क्यूँ फसती है? बेइरादा है ज़िन्दगी.
है अपना रास्ता लापता, फिर भी सीना मैं तान चला, बेवजह ही बे-इन्तेहाँ खुदके इरादों में जान है फँसी

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