मैं और मैं!

अद्वैयता की बात भी है एक,और एक कहानी दो ‘मैं’ कीअद्वैयता नही है आसान कहीं,दो मैं पाता हर कोई मैं हूँ वो जो सुनता सब कीमैं ही वो जो सुनूँगा नहींमैं हूँ वो जो दिल से बोलेमैं हूँ वो जो बुजदिल भी बात बड़ी अंजानी सी हैबात मगर है एक सटीकमेरी नहीँ कोई एक है …

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